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राहुल सांकृत्यायन- बहुआयामी साहित्यकार, शोधकर्ता और विद्वान Rahul Sankrityayan – Multifaceted litterateur, researcher and scholar

राहुल सांकृत्यायन (9 अप्रैल 1893 - 14 अप्रैल 1963)


👉इनका जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में हुआ था, बचपन का नाम केदारनाथ पाण्डे था।

👉इन्हें आधुनिक हिन्दी यात्रा-साहित्य का 'जनक' माना जाता है, जिन्होंने 'अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा' का मंत्र दिया।

👉वे बहुभाषाविद् थे और उन्हें पाली, प्राकृत, अपभ्रंश, तिब्बती, चीनी, रूसी और फ़ारसी सहित लगभग 36 भाषाओं का गहरा ज्ञान था।

👉तिब्बत की अपनी चार कठिन यात्राओं के दौरान वे वहाँ से हज़ारों दुर्लभ संस्कृत पांडुलिपियाँ भारत लाए।

👉बौद्ध धर्म पर उनके गहन शोध के कारण उन्हें काशी के विद्वानों ने 'महापण्डित' की उपाधि से विभूषित किया।

👉इतिहास ग्रंथ 'मध्य एशिया का इतिहास' के लिए उन्हें वर्ष 1958 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

👉साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1963 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।

👉वे एक क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी भी थे, जिन्होंने किसान आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और जेल भी गए।

✍️प्रसिद्ध कृतियाँ :

🙏वोल्गा से गंगा (कहानी संग्रह), दर्शन-दिग्दर्शन, मध्य एशिया का इतिहास, घुमक्कड़ शास्त्र, मेरी लद्दाख यात्रा, तिब्बत में सवा वर्ष, सिंह सेनापति, जय यौधेय, और उनकी आत्मकथा 'मेरी जीवन यात्रा'.....

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