23.3.26

Review Officer (RO) / Assistant Review Officer ( ARO ) Preperation kaise karein?

Review Officer (RO) aur Assistant Review Officer (ARO) ki taiyari ke liye ek mazboot strategy aur sahi resources ka hona bahut zaroori hai. Yeh exam do main parts mein divide hota hai: General Studies (GS) aur General Hindi.

Yahan kuch behtareen sources ki list di gayi hai:
1. General Studies (GS)
GS ka syllabus kaafi bada hota hai, isliye standard books par focus karein:
 History: S.K. Pandey (Ancient, Medieval, Modern) ya Spectrum (Modern History ke liye).

  Geography: Mahesh Kumar Barnwal ya NCERT (Class 11 & 12). Mapping ke liye Oxford Atlas zaroori hai.

 Polity: M. Laxmikanth (sabse best source hai).

 Economy: Pratiyogita Darpan ka extra issue ya basic concepts ke liye Lucent.

  Science: Lucent General Science ya Ghatna Chakra Purvavlokan.

 UP Special: Pariksha Vani (RO/ARO ke liye yeh mandatory hai).

2. General Hindi (Sabse Scoring Part)
Hindi hi woh subject hai jo selection decide karta hai. Prelims mein 60 marks ki Hindi aati hai.

  P.N. Pandey (Prithvi Nath Pandey): Yeh book authentic maani jaati hai.

  Hardev Bahri: Vocabulary aur grammar ke liye best hai.

 Aditya Publication: Isme purane exams ke questions ka achha collection mil jayega.

3. Current Affairs
  Monthly Magazine: Ghatna Chakra ya Pratiyogita Darpan.
 *Yearly Compilation: Exam se pehle Eye-Witness (Drishti) ki compilation zaroori hai.

4. Master Strategy: Ghatna Chakra Purvavlokan
RO/ARO exam ke liye Ghatna Chakra Purvavlokan (Previous Year Solved Papers) ki series sabse zyada important hai.

  Isme UPPSC ke purane saalon ke questions subject-wise diye hote hain.
  Inhe kam se kam 3-4 baar solve karein kyunki UPPSC mein questions aksar repeat hote hain.

Banganga, Mata Vaishno Devi.

Mata MayaDevi Ji ka Temple, हरिद्वार 🚩

Maa Baida Samaya Mata Mandir Bhanpur 🚩

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21.3.26

Nainital

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Chemical Rain Information 🌧️

बिल गेट्स और "केमिकल बारिश" से जुड़ी खबरें अक्सर Solar Geoengineering (सौर भू-अभियांत्रिकी) नाम की तकनीक की वजह से चर्चा में रहती हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं, लेकिन इसकी सच्चाई वैज्ञानिक और शोध के नजरिए से थोड़ी अलग है।

यहाँ इस पूरे विषय का मुख्य विवरण दिया गया है:
1. असली प्रोजेक्ट क्या है?
बिल गेट्स ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक प्रोजेक्ट SCoPEx (Stratospheric Controlled Perturbation Experiment) को आर्थिक सहायता दी थी।

 मकसद: इस तकनीक का उद्देश्य आसमान में कैल्शियम कार्बोनेट जैसे कणों का छिड़काव करना है ताकि सूरज की रोशनी का कुछ हिस्सा वापस अंतरिक्ष में परावर्तित (reflect) हो सके। इससे ग्लोबल वार्मिंग को कम करने और धरती के तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

  क्या यह बारिश के लिए है? नहीं, यह सीधे तौर पर बारिश कराने के लिए नहीं, बल्कि "सूरज की रोशनी को रोकने" (Sun-dimming) का एक प्रयोग है।

2. "केमिकल बारिश" और भ्रम (Chemtrails)
इंटरनेट पर चल रही "केमिकल बारिश" की बातें अक्सर 'Chemtrails' नाम की पुरानी थ्योरी से प्रेरित होती हैं।

  दावा: लोग मानते हैं कि विमानों के पीछे दिखने वाली सफेद लकीरें खतरनाक रसायन हैं जो बीमारियों या मौसम बदलने के लिए छोड़े जाते हैं।

 सच्चाई: वैज्ञानिक रूप से वे लकीरें सिर्फ जलवाष्प (Water Vapor) होती हैं जो ऊंचाई पर ठंड की वजह से जम जाती हैं। बिल गेट्स का प्रोजेक्ट अभी भी केवल रिसर्च और छोटे परीक्षणों के स्तर पर है, और इसका कोई व्यापक "केमिकल स्प्रे" प्रोग्राम शुरू नहीं हुआ है।

3. विवाद और विरोध क्यों?
 पर्यावरण पर असर: वैज्ञानिकों का एक वर्ग डरता है कि ओजोन परत को नुकसान पहुँच सकता है या मानसून का चक्र बिगड़ सकता है।

  स्वीडन में रोक: 2021 में स्वीडन में इस प्रोजेक्ट का एक परीक्षण होने वाला था, जिसे स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के विरोध के कारण रद्द कर दिया गया था।

सारांश
बिल गेट्स "केमिकल बारिश" नहीं करा रहे हैं, बल्कि वे उस तकनीक पर रिसर्च फंड कर रहे हैं जो भविष्य में जलवायु परिवर्तन से लड़ने का एक तरीका हो सकती है। फिलहाल, बड़े पैमाने पर ऐसा कोई भी छिड़काव दुनिया में कहीं भी सक्रिय नहीं है।

Angna Padharo Maharani Meri Sharda Bhawani Maa 🌺🌼🪷🌻🌼🌺

 


18.3.26

Single Phase, Double Phase, Three Phase in Electricity

Electricity connection mein Phase ka matlab hota hai woh wire jo power supply lekar aata hai.

Ise aasaan bhasha mein samajhte hain:

1. Single Phase (Single Face)
Yeh sabse sadharan connection hai jo hamare gharon mein hota hai.

 Kya hai: Isme do wires hote hain—ek Phase (jisne current aata hai) aur ek Neutral (jo circuit pura karta hai).

  Kiske liye: Ghar ke chote upkaran jaise Pankha, LED bulb, TV aur Fridge chalane ke liye kaafi hai.

 Load: Isme zyada heavy load nahi daal sakte.

2. Two Phase (2 Face)
Yeh connection aamtaur par gharon mein kam aur purani machines ya kuch khaas ilakon mein dikhta hai.

  Kya hai: Isme do Phase wires hote hain aur ek Neutral.

  Kiske liye: Jab Single Phase se thoda zyada load chahiye ho lekin 3-Phase ki zaroorat na ho. Iska istemal aajkal kam ho gaya hai.

3. Three Phase (3 Face)

Yeh sabse powerful connection hota hai.

 Kya hai: Isme teen alag-alag Phase wires hote hain aur ek Neutral.

  Kiske liye:  Heavy Load: Agar ghar mein 3-4 AC hain ya badi motor hai.

    Industrial Use: Chakki (Flour mill), badi workshop, ya factory chalane ke liye.

 Fayda: Isme agar ek phase ki light chali jaye, toh baaki do phases se kaam chalaaya ja sakta hai (Changeover switch ke zariye). Saath hi, badi machines isse bina jhatke ke smoothly chalti hain.

यदि कोई वैध टिकट धारक (Bonafide Passenger) स्टेशन परिसर में प्रवेश कर चुका है, तो रेलवे उसकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हो जाता है।

श्राइन बोर्ड और पंडित जी का मामला जब कोर्ट पहुंचा

जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख (J&K&L) उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) की कानूनी स्थिति को स्पष्ट किया गया है।

यहाँ इस फैसले का आसान और विस्तृत विवरण दिया गया है:

1. मुख्य फैसला: क्या श्राइन बोर्ड 'राज्य' (State) है?

अदालत ने यह स्पष्ट किया कि श्राइन बोर्ड संविधान के अनुच्छेद 12 (Article 12) के तहत 'राज्य' की परिभाषा में नहीं आता है।

 अनुच्छेद 12 क्या है? 
यह अनुच्छेद तय करता है कि कौन से संस्थान 'सरकार' या 'राज्य' माने जाएंगे। अगर कोई संस्था 'राज्य' है, तो उस पर मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) को लागू करने की जिम्मेदारी होती है और नागरिक उसके खिलाफ सीधे हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकते हैं।

 कोर्ट का तर्क: कोर्ट ने कहा कि भले ही श्राइन बोर्ड एक कानून (1986 का एक्ट) के जरिए बना है, लेकिन इस पर सरकार का गहरा या व्यापक नियंत्रण (Deep and Pervasive Control) नहीं है। बोर्ड अपने फैसले खुद लेता है और इसके कामकाज में सरकार का सीधा हस्तक्षेप नहीं होता।

2. मामला क्या था?
यह मामला एक पुजारी से जुड़ा था जिसकी सेवाओं को बोर्ड ने समाप्त (Discontinue) कर दिया था।

  पुजारी की दलील: पुजारी ने अपनी बर्खास्तगी को कोर्ट में चुनौती दी और तर्क दिया कि श्राइन बोर्ड एक सरकारी संस्था है, इसलिए उसकी सेवा समाप्त करना उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

  1986 के अधिनियम की धारा 14(2): पुजारी ने इस कानून की धारा 14(2) की संवैधानिकता को भी चुनौती दी थी, जो बोर्ड को कर्मचारियों की सेवाओं के संबंध में अधिकार देती है।

3. कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
हाई कोर्ट ने पुजारी की याचिका को निम्नलिखित आधारों पर खारिज कर दिया:

  रिट याचिका का अधिकार नहीं: चूंकि बोर्ड 'राज्य' नहीं है, इसलिए उसके खिलाफ सेवा संबंधी मामलों (Service Matters) के लिए सीधे हाई कोर्ट में रिट याचिका (Writ Petition) दायर नहीं की जा सकती।

  निजी विवाद: कोर्ट ने इसे बोर्ड और कर्मचारी के बीच का एक निजी अनुबंधात्मक (Contractual) मामला माना, न कि कोई सार्वजनिक कर्तव्य का उल्लंघन।

 कानून की वैधता: कोर्ट ने 1986 के अधिनियम की धारा 14(2) को सही ठहराया और कहा कि यह असंवैधानिक नहीं है।

निष्कर्ष 
इस फैसले का मतलब यह है कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को एक स्वतंत्र वैधानिक निकाय (Independent Statutory Body) माना जाएगा, न कि सरकार का कोई अंग। इसके कर्मचारियों के विवादों को सामान्य नागरिक कानूनों (Civil Laws) के तहत सुलझाया जाना चाहिए, न कि संवैधानिक रिट याचिकाओं के माध्यम से।

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The chirping of birds and beautiful flowers.


 

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Gulabbo 💕

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Mahadev aur Parvati Maa 💕😊

Chameli

8.3.26

8 March


"किसी एक विशेष दिन की क्या ज़रूरत, जब महिलाओं की उपस्थिति से ही हर दिन विशेष बन जाता है। उन सभी अद्भुत महिलाओं को नमन, जो दुनिया को और भी सुंदर बनाती हैं।  #InternationalWomensDay 🌸✨

28.1.26

Dark Horse Novel by Nilotpal Mrinal Ji ✨✨✨✨✨💕


डार्क हॉर्स मतलब, रेस में दौड़ता ऐसा घोड़ा जिसपर किसी ने दांव नहीं लगाया हो, जिससे किसी ने जीतने की उम्मीद न की हो और वही घोड़ा सबको पीछे छोड़ आगे निकल जाए, वही 'Dark Horse' कहलाता है। डार्क हॉर्स जिसको 'नीलोत्पल मृणाल' जी ने लिखा है कि जितनी तारीफ़ की जाए उतनी कम है। इनके लेखन की सबसे अच्छी बात यह है कि ये खुद पात्रों को उन्हीं के भाषा में बोलने देते हैं जिससे पढ़ने में आपको आनंद आता है। यदि आप सिविल सर्विसेज या किसी भी एग्जाम की तैयारी करने जा रहे हैं तो सबसे पहले यह उपन्यास जरूर पढ़ें। एक तैयारी करने वाला बच्चा किन-किन चीज़ों से गुजरता है..सब आपको मालूम चल जाएगा और यह भी सीख मिलेगा कि कहां क्या करना है, क्या नहीं करना है! श्री राम भईया द्वारा बताए गए कई उपन्यास पढ़ कर मुझे बहुत कुछ जानने और सीखने को मिल रहा है। आप सभी से भी मैं यह कहना चाहूंगा कि किताबें पढ़ने की आदत डालें।

23.1.26

Gunaho Ka Devta Review



जब आप नीलोत्पल मृणाल जी द्वारा लिखा उपन्यास 'औघड़' पढ़ते हैं तो न चाहते हुए भी आप इसमें डूब जाते हैं। साहित्य समाज का दर्पण होता है यह बात भी आप औघड़ पढ़ते हुए जान जाएंगे। इसमें आपको गांव की जिंदगी और वहां की राजनीति, जाति-पाति, छुआछूत, ऊंच-नीच और कई पहलुओं को बताया हुआ है। इतना बढ़िया तरीके से उपन्यास को लिखा गया है कि जब आप पढ़ते हैं तो सबकुछ आपके मस्तिष्क में दिखाई पड़ता है, इसको लेखन की कला कह सकते हैं। आप जब समापन की ओर बढ़ते हैं तो दिल की धड़कने बढ़ जाती है, विरंची के लिए आपका सम्मान बढ़ जाता है और आप दंग रह जाते हैं कि ऐसा नहीं होना था!