18.1.26

Aughad by Nilotpal Mrinal. 5*/5*


जब आप नीलोत्पल मृणाल जी द्वारा लिखा उपन्यास 'औघड़' पढ़ते हैं तो न चाहते हुए भी आप इसमें डूब जाते हैं। साहित्य समाज का दर्पण होता है यह बात भी आप औघड़ पढ़ते हुए जान जाएंगे। इसमें आपको गांव की जिंदगी और वहां की राजनीति, जाति-पाति, छुआछूत, ऊंच-नीच और कई पहलुओं को बताया हुआ है। इतना बढ़िया तरीके से उपन्यास को लिखा गया है कि जब आप पढ़ते हैं तो सबकुछ आपके मस्तिष्क में दिखाई पड़ता है, इसको लेखन की कला कह सकते हैं। आप जब समापन की ओर बढ़ते हैं तो दिल की धड़कने बढ़ जाती है, विरंची के लिए आपका सम्मान बढ़ जाता है और आप दंग रह जाते हैं कि ऐसा नहीं होना था!

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