Friday, 27 March 2026

भारत में बिजली का उत्पादन कैसे होता है?

भारत में बिजली का उत्पादन मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार के ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से होता है। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पारंपरिक (Thermal) और नवीकरणीय (Renewable) दोनों ही तरीकों पर निर्भर है।

यहाँ भारत में बिजली उत्पादन के प्रमुख माध्यमों का विवरण दिया गया है:

1. तापीय ऊर्जा (Thermal Power)
भारत में बिजली का सबसे बड़ा हिस्सा अभी भी थर्मल पावर प्लांट से आता है। इसमें ईंधन को जलाकर पानी को भाप में बदला जाता है, जो टरबाइन को घुमाता है।

  कोयला (Coal): यह भारत का मुख्य ऊर्जा स्रोत है। देश की लगभग 50% से अधिक बिजली क्षमता कोयले पर आधारित है।

  गैस और तेल: इनका उपयोग तुलनात्मक रूप से कम होता है, लेकिन पीक डिमांड के दौरान ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

2. नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy)
हाल के वर्षों में भारत ने स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ाए हैं।

  सौर ऊर्जा (Solar Energy): भारत में सौर ऊर्जा की क्षमता बहुत तेजी से बढ़ रही है। राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में विशाल सोलर पार्क स्थापित किए गए हैं।

  पवन ऊर्जा (Wind Energy): तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे तटीय राज्यों में पवन चक्कियों के माध्यम से भारी मात्रा में बिजली बनाई जाती है।

  बायोमास (Biomass): कृषि अवशेषों और जैविक कचरे का उपयोग करके भी बिजली उत्पादन किया जाता है।

3. जल विद्युत (Hydroelectric Power)
नदियों के बहते पानी या बांधों में जमा पानी का उपयोग करके टरबाइन घुमाए जाते हैं। भारत में हिमालयी क्षेत्र और दक्षिण भारत की नदियाँ जल विद्युत उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। यह ग्रिड को स्थिरता देने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

4. परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power)
भारत में वर्तमान में कई परमाणु रिएक्टर चालू हैं (जैसे तारापुर, कुडनकुलम और कैगा)। हालांकि कुल उत्पादन में इसका हिस्सा कम है, लेकिन यह निरंतर और कार्बन-मुक्त बिजली का एक ठोस स्रोत है।

वर्तमान स्थिति और लक्ष्य
भारत सरकार ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-fossil fuel) क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसका मतलब है कि भविष्य में हम कोयले पर निर्भरता कम करके सौर और पवन ऊर्जा पर अधिक ध्यान देंगे।


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