20.6.26

भरत तिवारी भोजपुर बिहार 💐

बिहार के भोजपुर (आरा) जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में जून 2026 में हुई भरत भूषण तिवारी (भरत तिवारी) की पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) और मौत का यह पूरा मामला इस समय काफी चर्चा और विवादों में है। इस घटना को लेकर पुलिस के दावे और परिवार/ग्रामीणों के आरोपों के बीच बड़ा विरोधाभास है।

इस पूरे मामले की मुख्य बातें नीचे विस्तार से दी गई हैं:

 1. घटना की शुरुआत और फेसबुक लाइव (Facebook Live)

 विवाद की वजह: परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, 30 वर्षीय भरत तिवारी इलाके में सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहता था। वह पास के जवनिया गांव के बाढ़ पीड़ितों को राहत और पुनर्वास न मिलने से प्रशासन से नाराज था। अपनी बात की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए उसने हाथ में पिस्टल लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।

 पुलिस से आमना-सामना: शिकायत मिलने पर जब पुलिस 16 जून को उसके घर पहुंची, तो भरत ने छत पर खड़े होकर पुलिसकर्मियों पर कथित रूप से पिस्टल तान दी और उन्हें वहां से जाने पर मजबूर कर दिया। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था।

 लाइव चुनौती: अगले दिन 17 जून को जब भारी संख्या में पुलिस और एसटीएफ (STF) की टीम ने उसके घर को घेरा, तो भरत तिवारी फेसबुक पर लाइव आ गया। लाइव वीडियो में वह हवाई फायरिंग करता हुआ और पुलिस को खुली चुनौती देता हुआ नजर आया। उसने वीडियो में कहा, *"यह बलिदान मेरा देश के लिए बेकार नहीं जाएगा... देखो मैं अकेला हूँ और ये सब इतने पुलिस वाले बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर मुझे पकड़ने आए हैं।"

2. पुलिस का दावा (Police Version)

  भोजपुर पुलिस के अनुसार, भरत तिवारी हाथ में हथियार लहराकर हवा में फायरिंग कर रहा था, जिससे आम जनता और इलाके की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया था।

 पुलिस का कहना है कि उसे बार-बार आत्मसमर्पण (Surrender) करने के लिए कहा गया, लेकिन उसने पुलिस टीम पर रुक-रुक कर फायरिंग जारी रखी।

  आत्मरक्षा और जनता की सुरक्षा के लिए पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें भरत तिवारी के दोनों पैरों (घुटने और जांघ के पास) में चार गोलियां लगीं। उसे इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल और फिर पटना (PMCH) रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

 3. परिवार और ग्रामीणों के आरोप (Family & Public Outrage)

 सरेंडर के बाद गोली मारने का आरोप: भरत के माता-पिता और ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई जायज एनकाउंटर नहीं, बल्कि 'कोल्ड-ब्लडेड मर्डर' (सोची-समझी हत्या) है। उनका दावा है कि पुलिस के समझाने और आश्वासन देने के बाद भरत ने अपनी पिस्टल नीचे फेंक दी थी और सरेंडर कर दिया था।

 परिजनों का कहना है कि जब वह पूरी तरह निहत्था हो चुका था, तब पुलिस ने उसे बेहद करीब से पैरों में चार गोलियां मारीं।

 मानसिक स्थिति: पुलिस ने शुरुआत में खुद माना था कि युवक मानसिक रूप से विक्षिप्त (Mentally Distressed) या तनाव में था। परिवार का कहना है कि एक मानसिक रूप से परेशान और निहत्थे युवक को काबू करने के बजाय सीधे गोली मार देना पुलिस की बर्बरता को दर्शाता है।

4. घटना के बाद का एक्शन और राजनीतिक मोड़

 सड़क जाम और प्रदर्शन: भरत की मौत की खबर आते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने आरा-बक्सर नेशनल हाईवे (फोरलेन) को जाम कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वे न्यायिक जांच और दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा देने की मांग कर रहे थे।

 सस्पेंशन और जांच: मामले के बढ़ते तूल को देखते हुए भोजपुर एसपी ने शाहपुर थानाध्यक्ष (SHO) राजेश मलाकार समेत 4 पुलिसकर्मियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। इसके साथ ही, एनकाउंटर के नियमों (SOP) के तहत मामले की स्वतंत्र जांच के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM) से मजिस्ट्रेट जांच (Magisterial Inquiry) कराने की सिफारिश की गई है।

 राजनीतिक बयानबाजी: इस घटना के बाद बिहार में सियासी पारा भी चढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी से लेकर बिहार सरकार के मंत्रियों और विपक्ष के नेताओं तक, सभी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।


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